वैदिक ज्योतिष के योग, नियम सहित समझाए गए
शास्त्रीय योग नियमों के अनुसार समझाए गए: कौन सा संयोजन योग बनाता है और कुंडली में इसका क्या अर्थ है।
अधि योग: जब शुभ ग्रह चंद्रमा को घेर लेते हैं
अधि योग: चंद्रमा से छठे, सातवें और आठवें भाव में शुभ ग्रह, बिना किसी पाप ग्रह के।
अमला योग: शास्त्रीय दृष्टि से एक निष्कलंक प्रतिष्ठा
अमला योग: लग्न या चंद्रमा से दसवें भाव में शुभ ग्रह, बिना किसी पाप ग्रह के।
अनफा योग: नियम, अर्थ और उदाहरण
चंद्रमा की राशि से ठीक पहले वाली राशि में ग्रह की उपस्थिति, जिसे स्वास्थ्य, सहजता और स्वाभाविक लोकप्रियता से जोड़ा जाता है।
चतुःसागर योग: हर दिशा में पहुंचता सहारा
चतुःसागर योग: चारों केंद्र भाव (1, 4, 7, 10), हर एक में कम से कम एक ग्रह।
धुरधुरा योग: नियम, अर्थ और उदाहरण
चंद्रमा के दोनों ओर की राशियों में पात्र ग्रहों की एक साथ उपस्थिति, जिसे अधिक स्थिर और साधन संपन्न समृद्धि से जोड़ा जाता है।
गौरी योग: गुरु के आशीर्वाद से स्थिर चंद्रमा
गौरी योग: कर्क या वृषभ राशि का चंद्रमा, केंद्र या त्रिकोण में, गुरु की दृष्टि के साथ।
कहल योग: अधिकार और आत्मविश्वास का रणसिंगा
कहल योग: चतुर्थेश का गुरु से परस्पर केंद्र में होना और मज़बूत लग्नेश, या चतुर्थेश का बलवान होकर दशमेश के साथ होना।
लक्ष्मी योग: धर्म में जड़ें जमाया भाग्य
लक्ष्मी योग: बलवान नवमेश केंद्र भाव में, साथ में मज़बूत लग्नेश।
महाभाग्य योग: नियम, अर्थ और उदाहरण
दिन में जन्म पर सूर्य, चंद्रमा और लग्न तीनों विषम राशियों में, या रात में जन्म पर तीनों सम राशियों में, जिसे असाधारण और टिकाऊ सौभाग्य से जोड़ा जाता है।
माला योग: बारह मालिका पैटर्न की पूरी जानकारी
सातों ग्रह माला की तरह सात लगातार भावों में गुंथे हुए, जिनका नाम शुरुआत वाले भाव के अनुसार बदलता है।
पर्वत योग: कुंडली में पहाड़ जैसी स्थिरता
पर्वत योग: कोई शुभ ग्रह केंद्र में, साथ में छठा और आठवां भाव खाली या केवल शुभ ग्रहों से भरे।
पुष्कल योग: आंतरिक ऊर्जा और भावनात्मक आधार का मिलन
पुष्कल योग: चंद्रमा का राशि स्वामी लग्नेश के साथ केंद्र में, लग्न पर या उस पर शुभ ग्रह की दृष्टि सहित।
शकट योग: गाड़ी के पहिये वाला पैटर्न, शांति से समझाया गया
शकट योग: चंद्रमा गुरु से छठे, आठवें या बारहवें भाव में, लग्न से केंद्र में चंद्रमा होने पर रद्द।
श्रीनाथ योग: परिष्कार, वाणी और कृपा का संरेखण
श्रीनाथ योग: शुक्र, बुध और नवमेश, हर एक बलवान और केंद्र या त्रिकोण भाव में।
सूनफा योग: नियम, अर्थ और उदाहरण
चंद्रमा की राशि के ठीक बाद वाली राशि में ग्रह की उपस्थिति, जिसे परिश्रम से अर्जित धन और प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है।
उभयचरी योग: नियम, अर्थ और उदाहरण
सूर्य के दोनों ओर की राशियों में पात्र ग्रहों की एक साथ उपस्थिति, जिसे संतुलन और साधन संपन्नता से जोड़ा जाता है।
वासी योग: नियम, अर्थ और उदाहरण
सूर्य की राशि से ठीक पहले वाली राशि में ग्रह की उपस्थिति, जिसे कौशल से अर्जित शांत क्षमता और प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है।
वसुमती योग: समय के साथ बनती स्थिर संपत्ति
वसुमती योग: तीनों शुभ ग्रह लग्न से किसी न किसी उपचय भाव (3, 6, 10 या 11) में।
वेसी योग: नियम, अर्थ और उदाहरण
सूर्य की राशि के ठीक बाद वाली राशि में ग्रह की उपस्थिति, जिसे स्थिर, सीधे परिश्रम और सामान्य पर टिके साधनों से जोड़ा जाता है।