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वैदिक ज्योतिष सीखें: कुंडली, दशा और अधिक

लग्न, दशा, अष्टकूट, नक्षत्र, पंचांग, मुहूर्त और आपकी कुंडली के हर शब्द के लिए सरल भाषा में समझ।

अष्टकवर्ग क्या है? बिंदु प्रणाली की सरल व्याख्या

आठ योगदाता हर ग्रह के चार्ट में तय बिंदु डालते हैं; सातों को जोड़ने पर वह सर्वाष्टकवर्ग बनता है जो ज़्यादातर रीडिंग में काम आता है।

अष्टकूट मिलान क्या है: 36 गुण कुंडली मिलान की पूरी व्याख्या

आठ कूट, कुल 36 अंक, और दो दोष जो कुल अंक से अलग जांचे जाते हैं।

विंशोत्तरी दशा क्या है: महादशा और अंतर्दशा की पूरी व्याख्या

नौ ग्रहों की दशाओं का 120 वर्ष का चक्र, और जन्म के समय चंद्रमा की सटीक स्थिति से आपकी पहली दशा का शेष कैसे तय होता है।

कुंडली कैसे पढ़ें: शुरुआती लोगों के लिए जन्म कुंडली की पूरी समझ

बारह भाव, लग्न, ग्रह और राशियां, उस व्यक्ति के लिए समझाए गए जो पहली बार कुंडली देख रहा है।

जैमिनी कारकांश समझें: चर कारक और आत्मकारक

अंश से क्रम दिए गए आठ ग्रह आत्मकारक से दारकारक तक आठ भूमिकाएं पाते हैं; आत्मकारक की नवांश राशि कारकांश बनती है।

काल सर्प दोष क्या है? शास्त्रीय अवधारणा और सच्चाई

काल सर्प दोष का इतिहास और शास्त्रीय तर्क, और असली जांच राशि से नहीं बल्कि अंश दर अंश क्यों होनी चाहिए।

KP पद्धति क्या है? कृष्णमूर्ति पद्धति की सरल व्याख्या

KP किसी ग्रह या भाव संधि को उसके नक्षत्र के भीतर नौ उप-स्वामी खंडों में से एक पर टिका देती है, वह कारक जिसे KP किसी खास प्रश्न के लिए सबसे निर्णायक मानती है।

मांगलिक दोष की गहरी समझ: इतिहास, अर्थ और दोष भंग

मांगलिक मिलान के पीछे का सांस्कृतिक भार, और कुंडली में मंगल की स्थिति को शांत मन से समझने का तरीका।

मुहूर्त क्या है? शुभ तारीख और समय चुनने की विधि

तीन परतें, कार्य की अपनी पसंद, सार्वभौमिक बहिष्कार और व्यक्तिगत ताराबल, मिलकर तय करती हैं कि सचमुच अच्छा मुहूर्त कैसा दिखता है।

नक्षत्र क्या है: 27 नक्षत्रों और उनके चरणों की पूरी समझ

आकाश के 27 बराबर हिस्से, हर एक का अपना स्वामी ग्रह, जन्म के समय चंद्रमा की सटीक स्थिति बताने के लिए।

पंचांग क्या है? दिन के पांच अंगों की पूरी जानकारी

हर दिन के पंचांग के पीछे के पांच शास्त्रीय अंग, और वही तरीका जिससे शुभ और अशुभ काल दोनों बनते हैं।

साढ़े साती की गहरी समझ: शनि का लंबा गोचर और उसका असली अर्थ

शनि की धीमी, लगभग साढ़े 29 साल की परिक्रमा ही वह कारण है जिससे यह गोचर इतना लंबा चलता है और इतना कम आता है।

षड्बल क्या है? ग्रह बल मापने की छह अंगों वाली विधि

विरूप में मापे गए छह शास्त्रीय अंग हर ग्रह के लिए एक बल अनुपात बनाते हैं, और प्योरोहित हर कुंडली में हर ग्रह के छहों अंग गणना करता है।

लग्न क्या है: जन्म कुंडली का आधार सरल भाषा में समझाया गया

जन्म के समय उदित हो रही राशि, जो पहला भाव बनती है और कुंडली के बाकी हर भाव का आधार है।

नवांश (D9) कुंडली क्या है: वर्ग कुंडली की पूरी व्याख्या

हर राशि का नौ भागों में बंटवारा, जो जन्म कुंडली को दोबारा सजाकर गहरी शक्ति और विवाह के संकेत दिखाता है।