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Bhilai का पंचांग, 31 अगस्त 2026

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सूर्योदय
05:47
सूर्यास्त
18:22
चंद्र मास (अमांत / पूर्णिमांत)
श्रावण / भाद्रपद

तिथि

  • कृष्ण तृतीया (तक 08:52)
  • कृष्ण चतुर्थी (पूरी रात जारी रहता है)

नक्षत्र

  • रेवती (तक 03:24, +1)
  • अश्विनी (पूरी रात जारी रहता है)

योग

  • Ganda (तक 01:51, +1)
  • Vriddhi (पूरी रात जारी रहता है)

करण

  • Vishti (तक 08:52)
  • Bava (तक 20:20)
  • Balava (पूरी रात जारी रहता है)

राहु काल, यमगंड, गुलिक काल

राहु काल
07:22-08:56
यमगंड
10:30-12:05
गुलिक काल
13:39-15:13
अभिजीत मुहूर्त
11:39-12:30

चौघड़िया, दिन

  • 05:47-07:22: अमृत (शुभ)
  • 07:22-08:56: काल (टालें)
  • 08:56-10:30: शुभ (शुभ)
  • 10:30-12:05: रोग (टालें)
  • 12:05-13:39: उद्वेग (टालें)
  • 13:39-15:13: चर (शुभ)
  • 15:13-16:47: लाभ (शुभ)
  • 16:47-18:22: अमृत (शुभ)

चौघड़िया, रात

  • 18:22-19:47: चर (शुभ)
  • 19:47-21:13: रोग (टालें)
  • 21:13-22:39: काल (टालें)
  • 22:39-00:05: लाभ (शुभ)
  • 00:05-01:30: उद्वेग (टालें)
  • 01:30-02:56: शुभ (शुभ)
  • 02:56-04:22: अमृत (शुभ)
  • 04:22-05:48: चर (शुभ)

आज के त्योहार और व्रत

आज कोई प्रमुख त्योहार या व्रत नहीं है।

यह पंचांग आपको क्या बताता है

पंचांग हिंदू पंचांग-प्रणाली है जो दिन के पाँच तत्व तय करती है: तिथि (चंद्रमा की कला, अमावस्या या पूर्णिमा से गिनी गई), नक्षत्र (27 में से कौन-सा नक्षत्र चंद्रमा में है), योग (सूर्य-चंद्र कोण से गणना), करण (आधी तिथि), और वार। ये पाँचों यहाँ उस शहर के अपने अक्षांश-देशांतर पर सूर्योदय के समय, वैदिक परंपरा और लाहिड़ी अयनांश के अनुसार गणना किए गए हैं, वही सिद्धांत जो पारंपरिक पंचांग उपयोग करते हैं। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल तीन ऐसे समय हैं जिन्हें पारंपरिक मुहूर्त-शास्त्र किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के आरंभ के लिए अशुभ मानता है; अभिजीत मुहूर्त, दिन के आठ बराबर भागों में से आठवाँ, मध्याह्न के आसपास, बुधवार को छोड़कर सामान्यतः शुभ माना जाता है। चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है, कुछ शुभ (अमृत, शुभ, लाभ, चर) और कुछ अशुभ (रोग, काल, उद्वेग)। चूँकि तिथि, नक्षत्र, योग और करण दिन के बीच में बदल सकते हैं, हर एक के साथ उसका ठीक स्थानीय समापन समय दिखाया गया है।

पास के शहरों का पंचांग

FAQ

सूर्योदय और सूर्यास्त से पंचांग क्यों बदलता है?

तिथि, नक्षत्र, योग और करण किसी विशेष स्थान के सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा की वास्तविक स्थिति से गणना किए जाते हैं, किसी तय घड़ी के समय से नहीं। एक ही तारीख़ पर दो शहरों का पंचांग थोड़ा अलग हो सकता है, क्योंकि उनका सूर्योदय समय अलग होता है।

राहु काल क्या है और क्या इसे टालना चाहिए?

राहु काल दिन के आठ बराबर भागों में से एक है, जिसका स्थान वार के अनुसार तय होता है। पारंपरिक मुहूर्त-शास्त्र इस समय नया, महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह देता है; सामान्य दैनिक कार्यों के लिए इसे हानिकारक नहीं माना जाता।

तिथि के नाम से पहले 'शुक्ल' या 'कृष्ण' का क्या अर्थ है?

शुक्ल पक्ष अमावस्या से पूर्णिमा तक का उजाला, बढ़ता पखवाड़ा है; कृष्ण पक्ष पूर्णिमा से अमावस्या तक का अंधेरा, घटता पखवाड़ा है। हर तिथि के नाम के साथ यह बताया जाता है कि वह किस पखवाड़े में आती है।

क्या यह पंचांग कोई महत्वपूर्ण तारीख़ चुनने के लिए पर्याप्त सटीक है?

यहाँ की गणनाएँ वैदिक परंपरा और लाहिड़ी अयनांश के अनुसार की गई हैं, वही सिद्धांत जो पारंपरिक पंचांग उपयोग करते हैं, इसलिए समय सटीक हैं। अपनी जन्म कुंडली के साथ मिलाकर तारीख़ जाँचनी हो तो हमारा मुहूर्त टूल और व्हाट्सएप पर पुरोहित आपकी कुंडली को उस दिन के साथ मिलाकर देख सकते हैं।