विवाह मुहूर्त, जुलाई 2010
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जुलाई 2010
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3 जुलाई 2010 · शनिवार
- नक्षत्र
- उत्तर भाद्रपद
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी
- अंक
- 2
साफ़ समय
- 11:45-12:40 (Abhijit)
- 07:03-08:46 (Shubh)
- 12:13-13:56 (Char)
यह तारीख़ क्यों
- Uttara Bhadrapada nakshatra: favorable for marriage
4 जुलाई 2010 · रविवार
- नक्षत्र
- उत्तर भाद्रपद
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी
- अंक
- 2
साफ़ समय
- 07:03-08:46 (Char)
- 08:46-10:30 (Labh)
- 10:30-12:13 (Amrit)
यह तारीख़ क्यों
- Uttara Bhadrapada/Revati nakshatra: favorable for marriage
5 जुलाई 2010 · सोमवार
- नक्षत्र
- रेवती
- तिथि
- कृष्ण अष्टमी
- अंक
- 2
साफ़ समय
- 05:20-07:04 (Amrit)
- 08:47-10:30 (Shubh)
- 15:39-17:23 (Labh)
यह तारीख़ क्यों
- Revati nakshatra: favorable for marriage
9 जुलाई 2010 · शुक्रवार
- नक्षत्र
- रोहिणी
- तिथि
- कृष्ण द्वादशी
- अंक
- 2
साफ़ समय
- 05:22-07:05 (Char)
- 08:48-10:31 (Amrit)
- 12:14-13:57 (Shubh)
यह तारीख़ क्यों
- Rohini/Mrigashira nakshatra: favorable for marriage
10 जुलाई 2010 · शनिवार
- नक्षत्र
- मृगशिरा
- तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी
- अंक
- 2
साफ़ समय
- 11:46-12:41 (Abhijit)
- 07:05-08:48 (Shubh)
- 12:14-13:57 (Char)
यह तारीख़ क्यों
- Mrigashira nakshatra: favorable for marriage
14 जुलाई 2010 · बुधवार
- नक्षत्र
- मघा
- तिथि
- शुक्ल तृतीया
- अंक
- 2
साफ़ समय
- 05:24-07:07 (Labh)
- 15:39-17:22 (Char)
- 17:22-19:04 (Labh)
यह तारीख़ क्यों
- Magha nakshatra: favorable for marriage
15 जुलाई 2010 · गुरुवार
- नक्षत्र
- मघा
- तिथि
- शुक्ल चतुर्थी
- अंक
- 2
साफ़ समय
- 11:47-12:42 (Abhijit)
- 10:32-12:14 (Char)
- 12:14-13:57 (Labh)
यह तारीख़ क्यों
- Magha/Uttara Phalguni nakshatra: favorable for marriage
16 जुलाई 2010 · शुक्रवार
- नक्षत्र
- उत्तर फाल्गुनी
- तिथि
- शुक्ल पंचमी
- अंक
- 2
साफ़ समय
- 05:25-07:08 (Char)
- 08:50-10:32 (Amrit)
- 12:15-13:57 (Shubh)
यह तारीख़ क्यों
- Uttara Phalguni/Hasta nakshatra: favorable for marriage
विवाह मुहूर्त सबसे अधिक पारंपरिक नियमों पर जाँचा जाता है: सूर्य छह निश्चित राशियों ('विवाह के महीनों') में से किसी एक में होना चाहिए, शुक्र और गुरु दोनों अस्त (सूर्य के बहुत करीब) नहीं होने चाहिए, और दिन का योग व करण एक छोटी वर्जित सूची में नहीं आना चाहिए। इन कठोर नियमों को पार करने वाली तारीख़ों में, रोहिणी, मृगशिरा या हस्त जैसा शुभ चंद्र नक्षत्र और वज़न जोड़ता है। चूँकि शुक्र और गुरु के अस्त होने की अवधि हफ्तों तक चलती है, कई बार पूरे महीने एक साथ बाहर हो जाते हैं, यही कारण है कि विवाह की तारीख़ें अक्सर कुछ महीनों में सिमट जाती हैं।
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