विवाह मुहूर्त, जुलाई 2004
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जुलाई 2004
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1 जुलाई 2004 · गुरुवार
- नक्षत्र
- मूल
- तिथि
- शुक्ल चतुर्दशी
- अंक
- 2
साफ़ समय
- 12:03-12:58 (Abhijit)
- 10:47-12:31 (Char)
- 12:31-14:14 (Labh)
यह तारीख़ क्यों
- Mula nakshatra: favorable for marriage
2 जुलाई 2004 · शुक्रवार
- नक्षत्र
- मूल
- तिथि
- शुक्ल पूर्णिमा
- अंक
- 2
साफ़ समय
- 05:37-07:20 (Char)
- 09:04-10:47 (Amrit)
- 12:31-14:14 (Shubh)
यह तारीख़ क्यों
- Mula nakshatra: favorable for marriage
3 जुलाई 2004 · शनिवार
- नक्षत्र
- उत्तराषाढ़ा
- तिथि
- कृष्ण प्रतिपदा
- अंक
- 2
साफ़ समय
- 12:03-12:59 (Abhijit)
- 07:21-09:04 (Shubh)
- 12:31-14:15 (Char)
यह तारीख़ क्यों
- Uttara Ashadha nakshatra: favorable for marriage
7 जुलाई 2004 · बुधवार
- नक्षत्र
- उत्तर भाद्रपद
- तिथि
- कृष्ण षष्ठी
- अंक
- 2
साफ़ समय
- 05:39-07:22 (Labh)
- 15:58-17:41 (Char)
- 17:41-19:25 (Labh)
यह तारीख़ क्यों
- Uttara Bhadrapada nakshatra: favorable for marriage
8 जुलाई 2004 · गुरुवार
- नक्षत्र
- उत्तर भाद्रपद
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी
- अंक
- 2
साफ़ समय
- 12:04-12:59 (Abhijit)
- 10:49-12:32 (Char)
- 12:32-14:15 (Labh)
यह तारीख़ क्यों
- Uttara Bhadrapada/Revati nakshatra: favorable for marriage
9 जुलाई 2004 · शुक्रवार
- नक्षत्र
- रेवती
- तिथि
- कृष्ण अष्टमी
- अंक
- 2
साफ़ समय
- 05:40-07:23 (Char)
- 09:06-10:49 (Amrit)
- 12:32-14:15 (Shubh)
यह तारीख़ क्यों
- Revati nakshatra: favorable for marriage
13 जुलाई 2004 · मंगलवार
- नक्षत्र
- रोहिणी
- तिथि
- कृष्ण एकादशी
- अंक
- 2
साफ़ समय
यह तारीख़ क्यों
- Rohini nakshatra: favorable for marriage
14 जुलाई 2004 · बुधवार
- नक्षत्र
- रोहिणी
- तिथि
- कृष्ण द्वादशी
- अंक
- 2
साफ़ समय
- 05:42-07:25 (Labh)
- 15:58-17:41 (Char)
- 17:41-19:23 (Labh)
यह तारीख़ क्यों
- Rohini/Mrigashira nakshatra: favorable for marriage
15 जुलाई 2004 · गुरुवार
- नक्षत्र
- मृगशिरा
- तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी
- अंक
- 2
साफ़ समय
- 12:05-13:00 (Abhijit)
- 10:50-12:33 (Char)
- 12:33-14:15 (Labh)
यह तारीख़ क्यों
- Mrigashira nakshatra: favorable for marriage
विवाह मुहूर्त सबसे अधिक पारंपरिक नियमों पर जाँचा जाता है: सूर्य छह निश्चित राशियों ('विवाह के महीनों') में से किसी एक में होना चाहिए, शुक्र और गुरु दोनों अस्त (सूर्य के बहुत करीब) नहीं होने चाहिए, और दिन का योग व करण एक छोटी वर्जित सूची में नहीं आना चाहिए। इन कठोर नियमों को पार करने वाली तारीख़ों में, रोहिणी, मृगशिरा या हस्त जैसा शुभ चंद्र नक्षत्र और वज़न जोड़ता है। चूँकि शुक्र और गुरु के अस्त होने की अवधि हफ्तों तक चलती है, कई बार पूरे महीने एक साथ बाहर हो जाते हैं, यही कारण है कि विवाह की तारीख़ें अक्सर कुछ महीनों में सिमट जाती हैं।
व्हाट्सएप पर अपना जन्म विवरण देकर व्यक्तिगत रूप से जाँची गई तारीख़ (ताराबल और चंद्रबल) पाएँ।