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मकर संक्रांति 1885: तारीख़ और महत्व

इस साल
12 जनवरी 1885
अगले साल
12 जनवरी 1886

गणना का आधार: Sun's sidereal ingress into Makara (next day if after local sunset)

मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का दिन है, वह दिन जब सूर्य का उत्तरायण, उत्तर की ओर यात्रा, आरंभ मानी जाती है। अधिकतर हिंदू त्योहारों के विपरीत, इसकी तारीख़ चंद्र नहीं बल्कि सौर कैलेंडर से तय होती है, इसलिए यह हर साल लगभग एक ही तारीख़ पर आती है। पूरे भारत में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है: गुजरात में पतंगबाज़ी, तमिलनाडु में पोंगल, असम में बिहू, और पंजाब में लोहड़ी (एक दिन पहले); पर हर जगह इसका भाव एक ही है, फसल और आते हुए लंबे दिनों के लिए कृतज्ञता। तिल-गुड़ बाँटना सर्दी के बाद आती गर्माहट का प्रतीक है, और इस दिन पवित्र नदी में स्नान विशेष पुण्यदायी माना जाता है।

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