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महाशिवरात्रि 1820: तारीख़ और महत्व

इस साल
12 फ़रवरी 1820
अगले साल
2 मार्च 1821

गणना का आधार: Magha/Phalguna Krishna Chaturdashi at Nishita

महाशिवरात्रि, 'शिव की महान रात्रि', माघ मास की कृष्ण चतुर्दशी को पड़ती है और इसे रात भर जागरण के रूप में मनाया जाता है, दिन के उत्सव के रूप में नहीं। मान्यता है कि इसी रात शिव ने सृष्टि, पालन और संहार का तांडव किया था, और यह उनके पार्वती से विवाह की रात भी है। भक्त दिन भर उपवास रखते हैं, रात को चार प्रहरों में जागरण करते हैं, और शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध और जल चढ़ाते हैं। चूँकि यह व्रत एक विशेष तिथि की विशेष मध्यरात्रि से जुड़ा है, अलग-अलग सूर्योदय समय वाले शहरों में तारीख़ एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

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