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करवा चौथ 1844: तारीख़ और महत्व

इस साल
29 अक्टूबर 1844
अगले साल
18 अक्टूबर 1845

गणना का आधार: Kartika (Purnimanta) Krishna Chaturthi at moonrise

करवा चौथ विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र और कुशलक्षेम के लिए रखा जाने वाला एक दिन का व्रत है, जो कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्थी को मनाया जाता है। व्रत सूर्योदय से पहले शुरू होकर चंद्रोदय तक चलता है, जब महिला पहले चंद्रमा को, पारंपरिक रूप से छलनी से, और फिर अपने पति को देखकर व्रत खोलती है। चूँकि यह व्रत किसी तय घड़ी के समय के बजाय चंद्रोदय से ही जुड़ा है, अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय के अनुसार तारीख़ एक दिन बदल सकती है। यह परंपरा उत्तर भारत में सबसे अधिक प्रचलित है।

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