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होली (रंगवाली) 1823: तारीख़ और महत्व

इस साल
26 फ़रवरी 1823
अगले साल
16 मार्च 1824

गणना का आधार: day after Phalguna Purnima (sunrise-prevailing)

होली, रंगों का त्योहार, फाल्गुन की पूर्णिमा के अगले दिन मनाया जाता है। पिछली रात, होलिका दहन में अलाव जलाया जाता है, प्रह्लाद की कथा की याद में, जिसकी भक्ति ने उसे बचाया जब राक्षसी होलिका उसे अपनी गोद में लेकर आग में बैठी, और स्वयं जल गई। अगली सुबह, रंगवाली होली में लोग एक-दूसरे को रंग और पानी से भिगोते हैं, परिवार और पड़ोसियों से मिलते हैं, और साल भर के गिले-शिकवे भुला देते हैं। होलिका दहन की तारीख़ इस पर निर्भर करती है कि उस पूर्णिमा तिथि में अशुभ भद्रा काल कब समाप्त होता है, इसलिए यह साल-दर-साल एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

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